श्री राधा चालीसा
चालीस दोहों से सुशोभित श्री राधा की महिमा का गुणगान ।
7 लेख उपलब्ध हैं
कीरति कुंवरी लाड़िली राधा, सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा - श्री राधा चालीसा (17)
हे कीरति कुंवरी श्री राधा, आपके स्मरण से समस्त प्रकार की संसार की बाधा मिट जाती है। हे लाड़िली जू, आपका नाम अमंगल के मूल का नाश कर देता है, तीनों तापों को हरने वाला है तथा श्री हरि [कृष्ण]और हर [शिव] के मन को भाने वाला है।
ब्रज जीवन धन राधा रानी - श्री राधा चालीसा (10)
हे श्री राधा रानी, आप ब्रज मंडल की जीवन धन हैं, आपकी महिमा अपार है जिसका वर्णन संभव नहीं है। आप श्री श्यामसुंदर संग गलबाँही दिए नित्य वृन्दावन में रमण करती हैं।
श्री राधा चालीसा - चालीस श्लोकों में श्री राधा महिमा गुणगान
हे वृषभानु नंदिनी श्री राधा, आप भक्तों के प्राणों की आधार हैं। हे वृन्दावन विहारिणी, मैं बार-बार आपको प्रणाम करता हूँ। हे कृष्ण प्रिया, हे समस्त सुखों की धाम, मैं जैसा भी हूँ, जो भी हूँ, परन्तु आपका ही हूँ।
श्री राधा सर्वेश्वरी रसिकेश्वर धनश्याम - श्री राधा चालीसा, अंतिम दोहा
हे सर्वेश्वरी श्री राधा एवं रसिकेश्वर श्री कृष्ण! ऐसी कृपा कीजिए कि मैं नित्य ही श्री वृन्दावन धाम में वास करता रहूँ।
जैसो तैसो रावरौ कृष्ण प्रिय सुख धाम - ब्रज के दोहे
हे कृष्ण-प्रिया श्री राधा! हे सुख की धाम! मैं जैसा भी हूँ, भला या बुरा, जैसा भी हूँ, निश्चित ही मैं आपका हूँ। कृपा करके मुझे अपने उन सुन्दर, सुखदायक और परम मनोहर चरणों की शरण प्रदान कीजिए। आपकी शरण ही इस जीव का एकमात्र परम आश्रय है।
“ रास विहारिणी श्यामा प्यारी | करुहू कृपा बरसाने वारि वृन्दावन है शरण तुम्हारी | जय जय जय वृषभानु दुलारी || ”
हे रासेश्वरी राधा, मुझे आशीर्वाद दो ताकि मैं तुम्हारी कृपा पा सकूं।
यशुमति नंदन पीछे फिरिहैं , जो कौउ राधा नाम सुमिरिहै - राधा चालिसा
श्री कृष्ण उन भक्तो के पीछे घूमते हैं जो राधा का नाम हृदय से जपते रहते है।