साधन धर्म न भटकना - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (6)
जीव चाहे जितने भी धर्म-कर्म, व्रत, तप या साधन क्यों न कर ले, उसकी भटकन समाप्त नहीं होती, और न ही वह अंततः लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है । केवल श्री राधारानी की कृपा से ही जीव को परम लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
