कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान - श्री सरस देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (4)
एक नित्य विहार का अनन्य उपासक कहता है कि कर्म, धर्म, ज्ञान, विज्ञान एवं नाना प्रकार की भक्ति को हम अपने ह्रदय में आने नहीं देते । और तो और वेद प्रतिपादित तत्व, साक्षात श्री वैकुण्ठनाथ, भगवान श्री राम, एवं श्री व्रजेंद्र नंदन श्री कृष्ण आदि भगवत स्वरूप का भी हम बखान नहीं करते ।
