सिद्धांत के पद [श्री सरस देव]

सिद्धांत के पद, ग्रंथ श्री सरस देव जी की वाणी में श्री सरस देव जू द्वारा लिखित सिद्धांत के पदों का संकलन है।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान - श्री सरस देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (4)

    एक नित्य विहार का अनन्य उपासक कहता है कि कर्म, धर्म, ज्ञान, विज्ञान एवं नाना प्रकार की भक्ति को हम अपने ह्रदय में आने नहीं देते । और तो और वेद प्रतिपादित तत्व, साक्षात श्री वैकुण्ठनाथ, भगवान श्री राम, एवं श्री व्रजेंद्र नंदन श्री कृष्ण आदि भगवत स्वरूप का भी हम बखान नहीं करते ।

  2. अब हीं बनी है बात, औसर समझि घात - श्री सरस देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (20)

    तेरी बिगड़ी बात बन सकती है, तुझे यह बड़ा सुंदर अवसर मिला है (मानव देह के रूप में) जिससे तू भगवान का भजन कर अपनी बिगड़ी बना सकता है। अब क्यों खिसिया रहा है, अनेक बार समझने के पश्चात भी तेरे को लज्जा नहीं आती ?

  3. काहू की आस न त्रास करै - श्री सरस देव जु, श्री सरस देव जु की वाणी, सिद्धांत के पद (14)

    नित्य विहार के उपासक ना तो किसी आशा में बंधते हैं, ना ही किसी परिस्थिति का भय उन्हें डिगा पाता है। उनका मन दृढ़ता और निश्चय में स्थिर रहता है।