सिद्धान्तमुक्तावली [श्री वल्लभाचार्य]

सिद्धान्तमुक्तावली, श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित सिद्धांत के मोतियों का एक हार है जिसमें श्री कृष्ण सेवा और सेवा से सम्बंधित बारीक बातों को बताया गया है । लेखक: महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. आत्मानंदसमुद्रस्थं कृष्णमेव विचिंतयेत् - श्री वल्लभाचार्य, सिद्धान्तमुक्तावली (16)

    जो जीव भक्ति भाव से श्री कृष्ण का चिंतन करता है वो अपने आनंद के समुद्र में रहता है। जो जीव सांसारिक लक्ष्य से कृष्ण की पूजा करते हैं, उन्हें हमेशा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

  2. नत्वा हरिं प्रवक्ष्यामि स्वसिद्धान्त विनिश्चयम् - श्री वल्लभाचार्य, सिद्धान्तमुक्तावली (1)

    श्री हरि के चरणों में प्रणाम करता हूँ एवं अब मैं अपने सिद्धांत को बताता हूँ । हर क्षण एवं हार कार्य करते हुए श्री कृष्ण की सेवा करो । सबसे उच्च कोटि की सेवा मानसी [मन से] सेवा है ।