श्री विष्णुदास

श्री विष्णुदास, ब्रज के एक संत-कवि।

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. श्री नवनागरी प्यारी यश तुम्हारौ मोहि भावै - श्री विष्णुदास जी

    हे नवनागरी प्यारी [राधिका], तुम्हारा यशोगान मुझे बहुत भाता है । हे नित्य बिहारिनी, श्री लाड़िली जी! भगवान श्री कृष्ण स्वयं आपका ही यश अपने मुख से गाते हैं ।

  2. श्री नवनागरी प्यारी तू वृन्दावन की रानी - श्री विष्णुदास जी

    हे नवनागरी श्री प्यारी जू, आप श्री वृंदावन की महारानी हैं। हे बिहारिनि लाडिली जू, हे प्यारी जू, ब्रह्मांड में समस्त रसिकों ने आपकी कीर्ति का बखान किया है।