युगल विहार शतक [श्री ललित किशोरी]

युगल विहार शतक श्री ललित किशोरी द्वारा रचित अभिलाष माधुरी का एक भाग है जिसमें उन्होंने युगल विहार को समर्पित 100 दोहों का संग्रह किया है । रचयिता: श्री ललित किशोरी

2 लेख उपलब्ध हैं

  1. जिनके मुहडे सों कड़े - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, युगल विहार शतक (17)

    जिन रसिक जनों के मुख से केवल युगल-विहार की ही रसीली बातें निकलती हैं, उन्हीं को अपने श्रवण और नयन दिन-रात अर्पित कीजिए—अन्य किसी को नहीं।