दुर्लभानां च परमं दुर्लभं मोहनं परम् सर्वशक्तिमयं देवि सर्वस्थानेषु गोपितम्।
सात्वतां स्थानमूर्द्धन्यं विष्णोरत्यंतदुर्लभम् नित्यं वृंदावनं नाम ब्रह्मांडोपरि संस्थितम्॥
पूर्णब्रह्मसुखैश्वर्यं नित्यमानंदमव्ययम् ।।
- पद्मपुराण, पातालखण्ड(5.69.7)
पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत दुर्लभ, सर्व मूर्धन्य नित्य वृन्दावन धाम ही सबसे श्रेष्ठ एवं समस्त ब्रह्माण्डों के ऊपर स्थित है”।
सात्वतां स्थानमूर्द्धन्यं विष्णोरत्यंतदुर्लभम् नित्यं वृंदावनं नाम ब्रह्मांडोपरि संस्थितम्॥
पूर्णब्रह्मसुखैश्वर्यं नित्यमानंदमव्ययम् ।।
- पद्मपुराण, पातालखण्ड(5.69.7)
पार्वती माता के पूछने पर शंकर जी द्वारा उत्तर: “ हे देवी ! समस्त स्थानों में गोप्य, सर्व शक्तिमय परम मोहन अतैव अत्यंत दुर्लभ, सर्व मूर्धन्य नित्य वृन्दावन धाम ही सबसे श्रेष्ठ एवं समस्त ब्रह्माण्डों के ऊपर स्थित है”।

