कृपा करि मोहि सुदृष्टि निहारो - श्री संकेत अली, संकेत लता (861)

कृपा करि मोहि सुदृष्टि निहारो - श्री संकेत अली, संकेत लता (861)

कृपा करि मोहि सुदृष्टि निहारो।
हे सर्वज्ञ सुजान शिरोमणि, अज्ञ अजान निवारो॥ [1]
सब जग कहत सुनत त्यौं देखत, बिरदन आप विसारो।
‘अलिसंकेत’ स्वामिनी सुनियै, दीजै चरण सहारो॥ [2]

- श्री संकेत अली, संकेत लता (861)

हे स्वामिनी जू (श्री राधा)! कृपा करके अपनी मंगलमयी कृपा-दृष्टि से मेरी ओर निहारिए। ही सर्वज्ञ, परम सुजान एवं सर्व-शिरोमणि! मेरी अज्ञानता और मूर्खता को दूर कर दीजिए। [1]

समस्त संसार आपकी करुणा और कृपालु स्वभाव की महिमा कहता, सुनता और प्रत्यक्ष देखता आया है; फिर मेरी बारी आने पर आपने अपने उसी प्रसिद्ध कृपालु स्वभाव को क्यों भुला दिया? श्री संकेत अलि विनती करते हैं, हे स्वामिनी! मेरी करुण पुकार सुनिए और मुझे अपने श्रीचरणों का आश्रय प्रदान कीजिए। [2]