सोवत जागत हरि भजो, हरि हिरदे न विसार।
डोरी गहि हरिनाम की, 'दया' न टूटै तार॥
- श्री दयाबाई
सोते और जागते हुए निरंतर श्री हरि का भजन करो, उन्हें अपने हृदय से कभी विस्मृत मत होने दो। श्री दयाबाई जी कहती हैं कि हरि-नाम की डोरी को ऐसे थामे रहो कि प्रभु-स्मरण का यह तार कभी टूटने न पाए।
डोरी गहि हरिनाम की, 'दया' न टूटै तार॥
- श्री दयाबाई
सोते और जागते हुए निरंतर श्री हरि का भजन करो, उन्हें अपने हृदय से कभी विस्मृत मत होने दो। श्री दयाबाई जी कहती हैं कि हरि-नाम की डोरी को ऐसे थामे रहो कि प्रभु-स्मरण का यह तार कभी टूटने न पाए।

