तेरह लाख सँडीले उपजे सब - श्री सूरदास मदनमोहन (गौड़ीय संत)

तेरह लाख सँडीले उपजे सब - श्री सूरदास मदनमोहन (गौड़ीय संत)

तेरह लाख सँडीले उपजे, सब साधुन मिल गटके।
'सूरदास मदनमोहन', वृंदाबन कों सटके॥

- श्री सूरदास मदनमोहन (गौड़ीय संत)

सूरदास मदनमोहन जी कहते हैं कि संडीला में प्राप्त तेरह लाख रुपये साधु-संतों की सेवा एवं भंडारे में समर्पित कर, वे स्वयं सब कुछ त्यागकर वृंदावन की ओर प्रस्थान कर गए। कहा जाता है कि वे अकबर के समय संडीला के राजस्व अधिकारी थे और शाही खजाने में भेजे गए संदूकों में कंकड़-पत्थर भरकर उनके भीतर यह दोहा लिख कर भिजवा दिया था। जब यह बात बादशाह अकबर तक पहुँची तो उन्होंने सूरदास मदनमोहन जी की निष्कपटता को देखते हुए उनको क्षमा कर उन्हें पुनः बुलाया, किंतु सूरदास जी राजकीय सेवा से विरक्त होकर श्रीवृन्दावन में ही रहने लगे थे।