राधा के दृग खेल में - श्री मतिराम, मतिराम ग्रंथावली, ललितलाम (216)

राधा के दृग खेल में - श्री मतिराम, मतिराम ग्रंथावली, ललितलाम (216)

राधा के दृग खेल में, मूंदे नंद-कुमार।
करन लगी दृगकोर सो, भई छवि उर पार॥

- श्री मतिराम, मतिराम ग्रंथावली, ललितलाम (216)

खेल-खेल में श्रीकृष्ण ने श्रीराधा के नेत्रों को बंद कर लिया, और फिर श्री राधा अपने नेत्रों की कोरों से ऐसे तिरछे कटाक्ष करने लगीं कि उनकी वह सम्मोहक चितवन श्रीकृष्ण के हृदय के आर-पार हो गई।