व्यास विझूका खेतकौ दुःख न काहू देइ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (146)

व्यास विझूका खेतकौ दुःख न काहू देइ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (146)

व्यास विझूका खेतकौ, दुःख न काहू देइ।
जो निसंक ह्वै जाइ, सो वस्तु घनेरी लेइ॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (146)

श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि जैसे खेत में खड़ा बिजूका (पुतला) देखने में भय उत्पन्न करता है, पर वास्तव में वह किसी को कोई हानि नहीं पहुँचा सकता, वैसे ही संसार के भय और बाधाएँ भी केवल भयभीत करती हैं। जो साधक प्रभु पर भरोसा रखकर, सब प्रकार की भय-बाधायों से निःशंक होकर आगे बढ़ता है, वह भक्ति और प्रेम-रस की अपार संपदा प्राप्त करता है।