(दोहा)
सुखनिधि सुन्दरि सरसनी, सुनि स्वामिनि मोरी जु।
दासि तिहारी जय प्रिया, श्रीराधा गोरी जु॥
(पद)
जय जय श्रीराधिका गोरी मदन मनमोहिनी जोरी।
रंगरंगीली छैलछबीली रस-भरी भोरी॥ [1]
सरसनी सुखसिंधु सुन्दरि स्वामिनी मोरी।
राखिये नित पास श्रीहरिप्रिया दासि हों तोरी॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (92)
(दोहा)
हे सुख-समुद्र-रूपा सुन्दरीजू, हे स्वामिनीजू, मेरी बात सुनिये! आप ही रस को उद्दीप्त करने वाली हैं। हे श्रीराधा गोरीजू, हे प्रियाजू, आपकी सदा जय हो। आप मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं सदा आपकी दासी बनी रहूँ।
(पद)
हे श्रीराधिका गोरीजू! आपकी सदा जय हो। अपने प्यारे मदनमोहन के मन को मोहित करने वाली मनमोहिनी आप ही हो। आप और आपके प्यारे की ही वास्तविक जोड़ी है। यद्यपि आप लालजू के रंग में रञ्जित, छैलछबीली और सदा रस से भरी हुई हैं, तथापि आप परम भोरी हैं। [1]
हे सुन्दरीजू! सुख-रूपी समुद्र को उद्दीप्त करने वाली आप ही हैं। हे मेरी स्वामिनीजू! मेरी यह प्रार्थना है कि आप मुझ हरिप्रिया, अपनी दासी को सदा अपने पास ही रखें। [2]
सुखनिधि सुन्दरि सरसनी, सुनि स्वामिनि मोरी जु।
दासि तिहारी जय प्रिया, श्रीराधा गोरी जु॥
(पद)
जय जय श्रीराधिका गोरी मदन मनमोहिनी जोरी।
रंगरंगीली छैलछबीली रस-भरी भोरी॥ [1]
सरसनी सुखसिंधु सुन्दरि स्वामिनी मोरी।
राखिये नित पास श्रीहरिप्रिया दासि हों तोरी॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (92)
(दोहा)
हे सुख-समुद्र-रूपा सुन्दरीजू, हे स्वामिनीजू, मेरी बात सुनिये! आप ही रस को उद्दीप्त करने वाली हैं। हे श्रीराधा गोरीजू, हे प्रियाजू, आपकी सदा जय हो। आप मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं सदा आपकी दासी बनी रहूँ।
(पद)
हे श्रीराधिका गोरीजू! आपकी सदा जय हो। अपने प्यारे मदनमोहन के मन को मोहित करने वाली मनमोहिनी आप ही हो। आप और आपके प्यारे की ही वास्तविक जोड़ी है। यद्यपि आप लालजू के रंग में रञ्जित, छैलछबीली और सदा रस से भरी हुई हैं, तथापि आप परम भोरी हैं। [1]
हे सुन्दरीजू! सुख-रूपी समुद्र को उद्दीप्त करने वाली आप ही हैं। हे मेरी स्वामिनीजू! मेरी यह प्रार्थना है कि आप मुझ हरिप्रिया, अपनी दासी को सदा अपने पास ही रखें। [2]

