श्रुति पुरान आगम स्‍मृति प्रेम सबहि को सार - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (10)

श्रुति पुरान आगम स्‍मृति प्रेम सबहि को सार - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (10)

श्रुति पुरान आगम स्‍मृति, प्रेम सबहि को सार।
प्रेम बिना नहिं उपज हिय, प्रेम-बीज अँकुवार॥

- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (10)

वेद, पुराण, आगम और स्मृतियाँ, इन सभी का परम सार प्रेम ही है। प्रेम के बिना हृदय में दिव्य प्रेम का बीज अंकुरित नहीं होता, अर्थात् दिव्य प्रेम की प्राप्ति अंततः प्रेम के द्वारा ही होती है।