देवतायतनानि कम्पन्ते राधाया हसन्ति नृत्यन्ति च सर्वाणि राधादैवतानि।
सर्वपापक्षयायेति व्याहृतिभिर्हुत्वाथ राधिकायै नमामः॥
- अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (03)
श्री राधिका की कृपा के लवलेश मात्र से देवता आनन्दित हो-होकर हँसते और नृत्य करते हैं और उनकी भृकुटी के नेक ही वक्र होने पर थर-थर काँपते हैं। अतः हम श्रुतियाँ भी सकल दोष-परिहार के लिए भूर्भुवः स्वः आदि व्याहृतियों के साथ स्तवन करती हुई उन्हें सदा अनुकूल करने के लिए वन्दना करती हैं।
सर्वपापक्षयायेति व्याहृतिभिर्हुत्वाथ राधिकायै नमामः॥
- अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (03)
श्री राधिका की कृपा के लवलेश मात्र से देवता आनन्दित हो-होकर हँसते और नृत्य करते हैं और उनकी भृकुटी के नेक ही वक्र होने पर थर-थर काँपते हैं। अतः हम श्रुतियाँ भी सकल दोष-परिहार के लिए भूर्भुवः स्वः आदि व्याहृतियों के साथ स्तवन करती हुई उन्हें सदा अनुकूल करने के लिए वन्दना करती हैं।

