अजापुत्र मैं मैं कहत दिये आपने प्रान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (100)

अजापुत्र मैं मैं कहत दिये आपने प्रान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (100)

अजापुत्र मैं मैं कहत, दिये आपने प्रान।
नारायण मैना भली, खाय मलीदा सान॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (100)

बकरा सदा ‘मैं-मैं’ करता हुआ अहंकार में जीता है, वह अंततः अपने ही प्राण गँवा बैठता है। इसके विपरीत, मैना पक्षी जैसी सरल वृत्ति भली है, जो सहजता से रहती है और जो मिले वही स्वाद से ग्रहण कर लेती है।