स्वामी श्री हरिदास जू, बीठल विपुल विनोद।
दासि बिहारिनि व्यास जू, पायौ रज सौं मोद॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
स्वामी श्रीहरिदास जी, श्रीविट्ठल विपुल जी, श्रीबिहारिनदास जी तथा श्रीहरिराम व्यास जी जैसे महान रसिकाचार्यों ने श्रीधाम वृंदावन की परम-पावन रज को ही अपने प्राणों का आधार माना और इसी रज की कृपा से उस दिव्य रस की प्राप्ति की।
दासि बिहारिनि व्यास जू, पायौ रज सौं मोद॥
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
स्वामी श्रीहरिदास जी, श्रीविट्ठल विपुल जी, श्रीबिहारिनदास जी तथा श्रीहरिराम व्यास जी जैसे महान रसिकाचार्यों ने श्रीधाम वृंदावन की परम-पावन रज को ही अपने प्राणों का आधार माना और इसी रज की कृपा से उस दिव्य रस की प्राप्ति की।

