यह रस अनुभव जनित है - चाचा श्री वृंदावन दास जी

यह रस अनुभव जनित है - चाचा श्री वृंदावन दास जी

यह रस अनुभव जनित है, मन दै गाढ़ी प्रीति।
श्री हरिवंश प्रसाद तें, पावै सुर्लभ रीति॥

- चाचा श्री वृंदावन दास जी

यह रस प्रत्यक्ष अनुभव से ही प्राप्त होता है, जिसके लिए मन में प्रगाढ़ प्रेम होना आवश्यक है। श्रीहित हरिवंश महाप्रभु की कृपा से इस रस की प्राप्ति सहज और सुलभ रीति से हो जाती है।