अँग-सँगनि सँग लै सखी लेउ - श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (122)

अँग-सँगनि सँग लै सखी लेउ - श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (122)

अँग-सँगनि सँग लै सखी, लेउ सबै सुख लूटि।
आज विजय दसमी निसा, विजय करौ जुग जूटि॥

- श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (122)

हे सखियों! अपनी समस्त अंग-संगिनी सहचरियों को साथ लेकर आज श्रीप्रियाप्रियतम के प्रेम-विलास के संपूर्ण रस का भरपूर आनंद लूट लो। आज विजयादशमी की रात्रि है, अतः श्रीराधा-कृष्ण की यह दिव्य युगल जोड़ी अपने परस्पर प्रेमानंद से करोड़ों कामदेवों को परास्त कर पूर्ण विजय प्राप्त करे।