राधा माधो तिहारी शरण तकि - श्री संकेत अली, संकेत लता (891)

राधा माधो तिहारी शरण तकि - श्री संकेत अली, संकेत लता (891)

राधा माधो तिहारी शरण तकि गही कीजिये पक्ष मेरी।
वृन्दारण्ये बसावो निरभय बिचरों मूढ़ता तोरि बेरी॥ [1]
दीजै सेवा खवासी विविध-करौं भावना धारि चित्तै।
देखौं लीला समीपै मुदित-हिय रहै आलि संकेत नित्तै॥ [2]

- श्री संकेत अली, संकेत लता (891)

हे श्रीराधा-माधव! मैंने आपकी शरण का आश्रय लिया है, अब आप मेरी रक्षा कीजिए और मुझ पर कृपा करके मेरा पक्ष रखिए। मुझे श्रीवृन्दावन के दिव्य वनों में निवास प्रदान कीजिए, जहाँ मैं निर्भय होकर विचरण कर सकूँ और अपनी मूढ़ता तथा अज्ञान के बन्धनों को तोड़कर मुक्त हो जाऊँ। [1]

मुझे अपनी दासी बनाकर विविध प्रकार की अन्तरंग सेवा का सौभाग्य प्रदान कीजिए, जिससे मैं अपने चित्त में नाना प्रकार की प्रेममयी सेवा-भावनाएँ धारण कर आपकी सेवा कर सकूँ। श्री संकेत अलि प्राथना करते हैं कि ऐसी कृपा करो कि मैं सदा आपके समीप रहकर, आपकी दिव्य लीलाओं का प्रेम-पूर्वक अवलोकन करता रहूँ।[2]