रूप की हैं गोपिका अनन्त प्रीति गीतिका हैं - ब्रज के कवित्त

रूप की हैं गोपिका अनन्त प्रीति गीतिका हैं - ब्रज के कवित्त

(कवित्त)
रूप की हैं गोपिका, अनन्त प्रीति–गीतिका हैं,
बाला बरसाने की, सुता हैं वृषभानु की। [1]
प्रतिमा हैं शक्ति की, अमित छवि शील की हैं
तापसी हैं तेजस् तारुण्य के कृशानु की॥ [2]
नायिका हैं नागरी, सकल-गुण-आगरी हैं,
गागरी हैं रूप-नवनीत के गुमान की। [3]
कर्षण-विकर्षण के सूत्रधार कृष्ण हैं,
तौ राधा नृत्य-भंगिमा हैं अणु-परमाणु की॥ [4]

- ब्रज के कवित्त

श्री राधा साक्षात सौंदर्य की गोपिका तथा अनंत प्रेम की मधुर गीतिका हैं; वे बरसाने की लाड़ली किशोरी और महाराज वृषभानु की सुपुत्री हैं। [1]

वे पराशक्ति की जीवंत प्रतिमा, असीम शील और सौंदर्य से सुशोभित हैं तथा नव-यौवन के दिव्य तेजस रूपी अग्नि की महान तपस्विनी हैं। [2]

वे अत्यंत चतुर रसिक नायिका और समस्त सद्गुणों का आगार हैं। वे ऐसी गागर के समान हैं, जो अनुपम रूप-सौन्दर्य के नवनीत और उसके गौरव से परिपूर्ण है। [3]

यदि संपूर्ण जगत् के आकर्षण और विकर्षण के मूल सूत्रधार श्री कृष्ण हैं, तो श्री राधा इस ब्रह्मांड के प्रत्येक अणु-परमाणु की सूक्ष्म नृत्य-भंगिमा हैं। [4]