नाम सुन्यौ हो गाँव बसि, नामी सौं न पिछानि।
पूछत पतौ मिल्यौ नहीं, बैठि गह्यौ धीगाँन॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (442)
जैसे किसी गाँव में एक ही नाम के अनेक व्यक्ति रहते हों, तो बिना परिचय और पहचान के केवल नाम जानकर किसी विशेष व्यक्ति को खोजना असंभव है। खोजते-खोजते मनुष्य अंततः थककर निराश हो जाता है। इसी प्रकार केवल भगवान् के नाम का जप पर्याप्त नहीं है। जब तक उनके किसी विशेष स्वरूप से प्रेमपूर्ण भाव-संबंध स्थापित न हो, तब तक उनकी वास्तविक प्राप्ति नहीं हो सकती।
पूछत पतौ मिल्यौ नहीं, बैठि गह्यौ धीगाँन॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (442)
जैसे किसी गाँव में एक ही नाम के अनेक व्यक्ति रहते हों, तो बिना परिचय और पहचान के केवल नाम जानकर किसी विशेष व्यक्ति को खोजना असंभव है। खोजते-खोजते मनुष्य अंततः थककर निराश हो जाता है। इसी प्रकार केवल भगवान् के नाम का जप पर्याप्त नहीं है। जब तक उनके किसी विशेष स्वरूप से प्रेमपूर्ण भाव-संबंध स्थापित न हो, तब तक उनकी वास्तविक प्राप्ति नहीं हो सकती।

