सुजस जाहु व्यौहार लागि परमारथ - श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (8)

सुजस जाहु व्यौहार लागि परमारथ - श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (8)

सुजस जाहु व्यौहार लागि, परमारथ लौ नाउं।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ॥

- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (8)

भले ही संसार के लोक-व्यवहार में मेरा यश और सुकीर्ति नष्ट हो जाए तथा परमार्थ के क्षेत्र में भी मेरा नाम पूर्ण रूप से मिट जाए, फिर भी मैं श्री धाम वृन्दावन को छोड़कर किसी भी अन्य स्थान पर कभी नहीं जाऊँगा।