राधे आनन निरखिकै, चकित रहे नंद-नंद।
प्रीति-रीति है अटपटी, भयौ चकोरहि चंद॥
- श्री ब्रज निधि, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (32)
श्री राधा के श्रीमुख को निहारकर स्वयं नंदनंदन श्री कृष्ण आश्चर्य चकित रह जाते हैं। प्रेम की रीति बड़ी विचित्र है कि त्रिभुवन-मोहन, ब्रजचन्द्र श्री कृष्ण भी चकोर की भाँति श्री राधा के मुख-चंद्र को टकटकी लगाए निहार रहे हैं।
प्रीति-रीति है अटपटी, भयौ चकोरहि चंद॥
- श्री ब्रज निधि, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (32)
श्री राधा के श्रीमुख को निहारकर स्वयं नंदनंदन श्री कृष्ण आश्चर्य चकित रह जाते हैं। प्रेम की रीति बड़ी विचित्र है कि त्रिभुवन-मोहन, ब्रजचन्द्र श्री कृष्ण भी चकोर की भाँति श्री राधा के मुख-चंद्र को टकटकी लगाए निहार रहे हैं।

