धन-धन वृन्दावन के साँप प्यारे।
ठाकुर के मन्दिर में बोलें, असल भुजंगी कारे॥ [1]
जिनको सौनी सौन लेत हैं, जे लाला के पारे।
‘अभयराम’ ऐ हू वड़भागी, रज में रहें विचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (81)
वृंदावन धाम के वे प्यारे सर्प अत्यंत धन्य हैं, जो श्रीठाकुरजी के मन्दिरों में निवास करते हैं और वहाँ अपनी फुफकार सुनाते हैं। [1]
ये सर्प श्रीलालजी के परम समीप रहने वाले हैं और उनकी पवित्र भूमि में ही विचरण करते हैं अथवा लाला के अत्यंत प्यारे हैं। श्रीअभयराम जी कहते हैं कि वे भी अत्यंत बड़भागी हैं जो सदा इस पावन रज में विचरते रहते हैं। [2]
ठाकुर के मन्दिर में बोलें, असल भुजंगी कारे॥ [1]
जिनको सौनी सौन लेत हैं, जे लाला के पारे।
‘अभयराम’ ऐ हू वड़भागी, रज में रहें विचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (81)
वृंदावन धाम के वे प्यारे सर्प अत्यंत धन्य हैं, जो श्रीठाकुरजी के मन्दिरों में निवास करते हैं और वहाँ अपनी फुफकार सुनाते हैं। [1]
ये सर्प श्रीलालजी के परम समीप रहने वाले हैं और उनकी पवित्र भूमि में ही विचरण करते हैं अथवा लाला के अत्यंत प्यारे हैं। श्रीअभयराम जी कहते हैं कि वे भी अत्यंत बड़भागी हैं जो सदा इस पावन रज में विचरते रहते हैं। [2]

