श्री वल्लभ वल्लभ रटत हो, वल्लभ जीवन प्राण।
श्रीवल्लभ कबहू न बिसारिहों, मोहि मात-पिता की आन॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (08)
मैं निरंतर 'श्री वल्लभ-श्री वल्लभ' नाम का रटन करता रहूँ क्योंकि श्री वल्लभ ही मेरे जीवन-प्राण हैं। मुझे अपने माता-पिता की सौगंध है, मैं श्री वल्लभ को कभी भी नहीं भूलूँगा और सर्वदा उनका ही स्मरण रखूँगा।
श्रीवल्लभ कबहू न बिसारिहों, मोहि मात-पिता की आन॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (08)
मैं निरंतर 'श्री वल्लभ-श्री वल्लभ' नाम का रटन करता रहूँ क्योंकि श्री वल्लभ ही मेरे जीवन-प्राण हैं। मुझे अपने माता-पिता की सौगंध है, मैं श्री वल्लभ को कभी भी नहीं भूलूँगा और सर्वदा उनका ही स्मरण रखूँगा।

