चिन्ता तो हरि नामकी, और न चितवै दास।
जो कछु चितवै नाम बिनु, सोई कालकी फाँस॥
- श्री कबीरदास
भक्त को केवल श्रीहरि के नाम का ही निरंतर चिंतन करना चाहिए और उसके अतिरिक्त किसी अन्य विषय का विचार नहीं करना चाहिए। श्रीहरिनाम के बिना जिन विषयों का मनुष्य चिन्तन करता है, वे सब अन्ततः उसे जन्म-मृत्यु के बन्धन में फँसाने वाले काल के फन्दे के समान हैं।
जो कछु चितवै नाम बिनु, सोई कालकी फाँस॥
- श्री कबीरदास
भक्त को केवल श्रीहरि के नाम का ही निरंतर चिंतन करना चाहिए और उसके अतिरिक्त किसी अन्य विषय का विचार नहीं करना चाहिए। श्रीहरिनाम के बिना जिन विषयों का मनुष्य चिन्तन करता है, वे सब अन्ततः उसे जन्म-मृत्यु के बन्धन में फँसाने वाले काल के फन्दे के समान हैं।

