प्रनत-पाल-विरदावली राखी आनि जहान - ब्रज के दोहे

प्रनत-पाल-विरदावली राखी आनि जहान - ब्रज के दोहे

प्रनत-पाल-विरदावली, राखी आनि जहान।
अव मम वार अवार कत, कीजत कृपानिधान॥

- ब्रज के दोहे

हे कृपानिधान (श्री कृष्ण)! आपने संपूर्ण संसार में अपने प्रणत-पाल (शरणागत-पालक) होने के यश की मर्यादा को सदा बनाए रखा है। फिर अब मेरी बारी आने पर आप मुझ पर कृपा करने में क्यों विलंब कर रहे हैं, कृपा कर मेरा भी आप उद्धार कीजिए।