(राग जैतश्री व बिलावल)
किशोरी तेरो रूप अनूपम भारी।
नैन चटपती रहत सदाई, निरखन भानु दुलारी॥ [1]
कबहुँक करो नज़र करुणा की, मेरी चूक बिसारी।
जब देख मुखचन्द्र सलोनो, तपन मिटे उर सारी॥ [2]
मम सर्वस धन प्रान जीवनी, तुम हो श्यामा प्यारी।
"रूपमाधुरी" शरण गही है, राखो लाज हमारी॥ [3]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (119)
हे श्री किशोरी जी! आपका रूप अत्यंत अनुपम और अलौकिक है। हे वृषभानु की दुलारी श्री राधा जू! मेरे नेत्र आपके इस रूप का निरंतर दर्शन करने के लिए सदैव आतुर और व्याकुल रहते हैं। [1]
कृपा कर आप मेरी कमियों की ओर ध्यान न दीजिए, मुझ पर कभी अपनी करुणा-दृष्टि कीजिये। आपके उस अत्यंत सुंदर मुख-चंद्र का दर्शन करते ही मेरे हृदय की समस्त तपन और संताप मिट जाएँगे। [2]
हे श्यामा प्यारी! आप ही मेरा सर्वस्व, धन, प्राण और जीवन की एकमात्र आधार हैं। श्री रूपमाधुरीजी कहते हैं कि मैंने आपकी शरण ग्रहण कर ली है, अब आप ही मेरी लाज रखिये। [3]
किशोरी तेरो रूप अनूपम भारी।
नैन चटपती रहत सदाई, निरखन भानु दुलारी॥ [1]
कबहुँक करो नज़र करुणा की, मेरी चूक बिसारी।
जब देख मुखचन्द्र सलोनो, तपन मिटे उर सारी॥ [2]
मम सर्वस धन प्रान जीवनी, तुम हो श्यामा प्यारी।
"रूपमाधुरी" शरण गही है, राखो लाज हमारी॥ [3]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (119)
हे श्री किशोरी जी! आपका रूप अत्यंत अनुपम और अलौकिक है। हे वृषभानु की दुलारी श्री राधा जू! मेरे नेत्र आपके इस रूप का निरंतर दर्शन करने के लिए सदैव आतुर और व्याकुल रहते हैं। [1]
कृपा कर आप मेरी कमियों की ओर ध्यान न दीजिए, मुझ पर कभी अपनी करुणा-दृष्टि कीजिये। आपके उस अत्यंत सुंदर मुख-चंद्र का दर्शन करते ही मेरे हृदय की समस्त तपन और संताप मिट जाएँगे। [2]
हे श्यामा प्यारी! आप ही मेरा सर्वस्व, धन, प्राण और जीवन की एकमात्र आधार हैं। श्री रूपमाधुरीजी कहते हैं कि मैंने आपकी शरण ग्रहण कर ली है, अब आप ही मेरी लाज रखिये। [3]

