न शैवा नच गाणेशा न सौरा न च वैष्णवा।
नशाक्त राधिका पाद दास्यलस्ये स्थिता वयम॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (97)
हम न तो शैव हैं, न गाणपत्य, न सौर, न वैष्णव और न ही शाक्त। अर्थात् हम शिव, गणेश, सूर्य, विष्णु और शक्ति—इन पंच-देवताओं की उपासना करने वाले किसी भी मत के अनुयायी नहीं हैं। हम तो केवल श्रीराधा के चरणकमलों की सेवा की अभिलाषा लिए बैठे हैं। हमें केवल उन्हीं पर भरोसा है कि वे ही अपनी अहैतुकी कृपा से हमें अपने चरणों की दास्य-सेवा का अधिकारी बनाएँगी।
नशाक्त राधिका पाद दास्यलस्ये स्थिता वयम॥
- श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (97)
हम न तो शैव हैं, न गाणपत्य, न सौर, न वैष्णव और न ही शाक्त। अर्थात् हम शिव, गणेश, सूर्य, विष्णु और शक्ति—इन पंच-देवताओं की उपासना करने वाले किसी भी मत के अनुयायी नहीं हैं। हम तो केवल श्रीराधा के चरणकमलों की सेवा की अभिलाषा लिए बैठे हैं। हमें केवल उन्हीं पर भरोसा है कि वे ही अपनी अहैतुकी कृपा से हमें अपने चरणों की दास्य-सेवा का अधिकारी बनाएँगी।

