कहि राधा किन हार चोरायो - श्री सूरदास, सूर सागर
चतुर सखियाँ श्री राधा से पूछती हैं: हे राधा, आपका मोतियों का हार किसने चुराया है?
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चतुर सखियाँ श्री राधा से पूछती हैं: हे राधा, आपका मोतियों का हार किसने चुराया है?
हे मेरे मन, तू महाराज नंद के पुत्र श्री श्यामसुन्दर का भजन कर ले। चाहे तू गृहस्थ हो या वानप्रस्थ, बिना भजन के तेरा उद्धार संभव नहीं है।
(श्री हित सजनी ने अपनी सखियों से कहा ) "हे माई ! देखो ! अबला ( श्रीराधा ) के बल राशि को तो देखो ! जिन श्रीराधा को देखते ही अत्यंत मतवाले एवं निरंकुश गजराज वत मोहन लाल भी उनकी केश लट के एक ( अल्प ) बंधन मे अपने आप ( बिना प्रयत्न के ही ) बंध गये !