आरती भानु दुलारी की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।
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मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।
हमारी किशोरी जी प्रेम-रस में सराबोर हैं। जड़े हुए रत्नों से युक्त सिंहासन पर सुशोभित हैं एवं उनकी रूप-माधुरी को देखकर मूर्तिमान श्रृंगार भी लज्जित होता है। मणिमंडित स्वर्ण मुकुट पर चन्द्रिका धारण किये हुए हैं।
आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की। दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै, दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै, दुहुँन दृग प्रेम सुधा छलकै, चसीले बैन, रसीले नैन, गँसीले सैन, दुहुँन मैनन मनहारी की॥