3 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. आरती भानु दुलारी की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

    मैं बृषभानु की लाड़िली पुत्री, बरसाने वारी राधे की आरती करता हूँ। राधा रानी दिव्य धाम वृंदावन में रत्न जड़ित स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं।

  2. प्रेम-रस-बोरी भानुदुलार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, श्रीराधा माधुरी (25)

    हमारी किशोरी जी प्रेम-रस में सराबोर हैं। जड़े हुए रत्नों से युक्त सिंहासन पर सुशोभित हैं एवं उनकी रूप-माधुरी को देखकर मूर्तिमान श्रृंगार भी लज्जित होता है। मणिमंडित स्वर्ण मुकुट पर चन्द्रिका धारण किये हुए हैं।

  3. आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

    आरती प्रीतम प्यारी की, कि बनवारी नथवारी की। दुहुँन सिर कनक-मुकुट झलकै, दुहुँन श्रुति कुण्डल भल हलकै, दुहुँन दृग प्रेम सुधा छलकै, चसीले बैन, रसीले नैन, गँसीले सैन, दुहुँन मैनन मनहारी की॥