श्रीहरिदास के संगम तीरथ - श्री कान्त रसिक
स्वामी श्री हरिदास जी की विशुद्ध नित्य विहार उपासना में न तो संगम-तीर्थ (कुम्भ स्नान) का महत्व है और न ही सूतक एवं पातक का।
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स्वामी श्री हरिदास जी की विशुद्ध नित्य विहार उपासना में न तो संगम-तीर्थ (कुम्भ स्नान) का महत्व है और न ही सूतक एवं पातक का।
श्री राधा मेरी सुख साज हैं, श्री राधा ही सिरताज हैं, श्री राधा समस्त इष्टदेवों में रत्न हैं, और श्री राधा ही सर्वस्व हैं।
श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी महाराज अखिल भारतीय जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य पीठ (सलेमाबाद, किशनगढ़) के एक सुप्रतिष्ठित आचार्य थे। इनकी विद्वत्ता और भक्ति भावना इनकी वाणी के अनुशीलन से स्पष्ट हो सकती है।
श्री भक्ति देवी दक्षिण भारत से आई थीं और वृद्धावस्था से पीड़ित थीं, वे हर जगह गईं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिला, और जब वे वृंदावन में ज्ञान गुदड़ी के इस स्थान पर पहुंचीं