राग तिलंग

राग तिलंग खमाज थाट से संभंधित है। यह बहुत ही मधुर राग है और कर्नाटक संगीत के राग हंसश्री से मिलता जुलता है। इस राग को रात्रि के दूसरे प्रहर में अर्थात 9 बजे से 12 बजे के बीच में गाया जाता है ।

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  1. सखी हों राधा चरण उपासी - श्री हित गोपाल दास, निकुंज रस वल्लरी (117)

    श्री राधा की एक अंतरंग सखी दूसरी सखी से कहती है: हे सखी, मैं तो श्री राधा चरणों की ही दृढ़ उपासी हूँ । उनके चरणों के अनन्य बल के गर्व से ही दिन रात भरी रहती हूँ एवं उनकी ही निज सेवा में मैं नित्य लगी रहती हूँ ।