अभिलाष बत्तीसी

अभिलाष बत्तीसी श्री राधावल्लभ संप्रदाय के श्री चंद्रलाल गोस्वामी द्वारा ब्रज भाषा में लिखा गया ग्रंथ है जो बत्तीस सवैया एवं कवित्त का संग्रह है जिसमें उनके ह्रदय कि अभिलाषा का वर्णन किया गया है ।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. मन की गति तौं तुम - श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी, अभिलाष बत्तीसी

    हे स्वामिनी जी! मेरे हृदय की वास्तविक दशा तो आप भली-भाँति जानती ही हैं; इस शरीर के बल से तो मुझसे कोई तप या आध्यात्मिक साधन सफल नहीं हो सकता। मैं नहीं जानता कि आपके किस अपार कृपा-बल से मुझे रसोपासना के परम आचार्य श्री हरिवंश महाप्रभु का यह पावन मार्ग प्राप्त हुआ है।

  2. राधा कृष्ण गावै रोम-रोम हरसावै - श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी, अभिलाष बत्तीसी

    जिनके द्वारा श्री राधा कृष्ण का गुणगान करने से रोम रोम हर्षित हो जाता है एवं प्रेम की मानो झरी से लग जाती है एवं अंग अंग पुलकित हो उठता है।