अष्टयाम प्रथम [श्री किशोरी अलि]

अष्टयाम प्रथम श्री वंशी अली के शिष्य श्री किशोरी अली द्वारा लिखा गया है।

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. नेहिन की गति जानत भाखी - श्री किशोरी अलि जी, अष्टयाम प्रथम (36)

    प्रेमियों की गति प्रेमी ही जानते हैं। जैसे गंगा जी में रहने वाला पपीहा पक्षी भी साक्षात गंगा जी के पानी को छोड़कर स्वाति बूँद की ओर ही निहारता है।