गिरिराज अष्टक [श्री लाल बलबीर]

गिरिराज अष्टक, "ब्रज बिनोद" ग्रन्थ का भाग है जिसके रचैयता श्री लाल बलबीर जी हैं। लेखकः श्री लाल बलबीर जी

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. श्रीराधा राधा रटौं , राधा ही कौ ध्यान - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (45)

    नित्य ही श्री राधा राधा ही रटो और राधा ही का ध्यान करो। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि मेरे हृदय में राधा नाम और राधा नाम की दिव्यता, प्रधानता और भव्यता नित्य बसी हुई है।

  2. चारों दिसि सोभित सदाँ, जाके संत समाज - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (1)

    जिसके चारों ओर संत-समाज का पावन निवास सदा शोभायमान रहता है, ऐसे श्री गिरिराज महाराज समस्त देवताओं में मुकुट-मणि हैं।

  3. श्रीराधा राधा रटौं - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (45)

    नित्य ही ‘राधा-राधा’ का जप करो और राधा का ही ध्यान करो। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि मेरे हृदय में राधा-नाम तथा राधा-नाम की दिव्यता, प्रधानता और भव्यता नित्य ही बसी हुई है।