नख सिख दर्शन [ब्रज बिनोद]

नख सिख दर्शन, "ब्रज बिनोद" ग्रन्थ का भाग है जिसमें श्री लाल बलबीर जी ने श्री राधा कृष्ण के शीर्ष से चरण तक की माधुरी का वर्णन बहुत ही सुन्दर रूप से किया गया है । लेखकः श्री लाल बलबीर जी

6 लेख उपलब्ध हैं

  1. जै जै श्री रासेश्वरी, बिनै सुनौ चित लाय - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, नख सिख दर्शन (15)

    रास की अधिष्ठात्री श्री रासेश्वरी (श्री राधा) की बारंबार जय हो! हे स्वामिनी! आप चित्त लगाकर मेरी इस लघु विनय को सुनिए। मैं आपकी उस अनुपम छवि का किंचित वर्णन करना चाहता हूँ; कृपा करके आप स्वयं मेरी सहायता कीजिए।

  2. श्रीराधे नंदलाल की चरण रेणु सिरधार - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, नख सिख दर्शन (14)

    युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण की चरण-रज, अर्थात् वृन्दावन-रज, को यदि कोई प्रेमपूर्वक अपने मस्तक पर धारण करे, तो उसके मन की समस्त अभिलाषाएँ सिद्ध होती हैं और उसके समस्त पाप भस्म हो जाते हैं।

  3. श्री वृषभान कुमारी छबि - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, नख सिख दर्शन (3)

    ऐसा कौन है जो श्री राधा की छवि का पूर्ण वर्णन कर सके? जिनके चरण-नख के एक कोर की छटा ही अनन्त कोटि चन्द्रमाओं के प्रकाश को भी हेय कर देती है।

  4. अपनी अपनी वस्तु सों - श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शीख नख वर्णन (02)

    संसार में सभी लोग अपनी-अपनी प्रिय वस्तुओं और सांसारिक संबंधों के सहारे ही समस्त व्यवहार और जीवन निर्वाह करते हैं। किंतु उन अनन्य रसिक भक्तों का जीवन धन्य है, जिनके लिए एकमात्र श्री वृषभानु-नन्दिनी (श्री राधा) ही उनका सर्वस्व धन एवं परम आधार हैं।