प्यारे तेरी वंशी राधा-राधा बोले - श्री प्रियादास
हे प्यारे! तेरी वंशी निरन्तर “राधा-राधा” का ही मधुर गान करती रहती है। अपनी अलौकिक धुन में वह श्री राधा के स्वरूप को प्रकट कर, बिना किसी मूल्य के ही सबके हृदय को हर लेती है।
प्रिया सखी, राधावल्लभ संप्रदाय के एक रसिक संत हैं।
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हे प्यारे! तेरी वंशी निरन्तर “राधा-राधा” का ही मधुर गान करती रहती है। अपनी अलौकिक धुन में वह श्री राधा के स्वरूप को प्रकट कर, बिना किसी मूल्य के ही सबके हृदय को हर लेती है।
“रा” का उच्चारण करने से संसार का भय कम हो जाता है, और समस्त कष्ट एवं बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।
हे सखी, मुझे श्री वृन्दावन बहुत प्यारा लगता है, जहाँ मेरे आँखों के तारे श्री राधावल्लभलाल विराजमान हैं।
श्री राधा-माधव सुरत-रंग-रस में लीन हैं। श्री राधा श्रीकृष्ण के प्रेम-वश हैं और श्रीकृष्ण श्री राधा के आधीन हैं।