श्री राधा प्रिया ( राधिकानाथ )

श्री राधा प्रिया (राधिकानाथ जी) ब्रज धाम के 16वीं शताब्दी के रसिक भक्त थे जो श्री रामराय जी के शिष्य थे। यह गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय से सम्बंधित थे।

10 लेख उपलब्ध हैं

  1. सदा सदा राजत जहाँ सघन लतन के झुंड - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

    गिरिराज गोवर्धन की पावन तलहटी में श्रीराधाकुंड अत्यंत सुशोभित है, जहाँ सघन लताओं के कुंज और वन-वाटिकाएँ सदैव अपनी छटा बिखेरती रहती हैं।

  2. सुख बर्धन मर्दन गरब, गोबर्धन गुन खान - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

    सुखों को बढ़ाने वाले, अहंकार का मर्दन करने वाले और समस्त गुणों की खान है श्री गोवर्धन, जिसका सेवन ‘श्री राधा प्रिया’ जी श्री वृंदावन धाम का स्वरूप जानकर करते हैं।

  3. मेरें तौ वृंदाविपिन, सब सुख कौ आधार - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

    मेरे समस्त सुखों का आधार तो एकमात्र श्री वृन्दावन धाम है, जहाँ समस्त सार का सार तत्व—दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण—नित्य विराजमान हैं।

  4. श्रीराधाकुण्ड की बलि जैये - श्रीराधा प्रिया जी

    श्री राधाप्रिया जी कहते हैं "श्री राधाकुण्ड पर बलिहार है, जो सघन लताओं एवं गोवर्धन से आच्छादित है, जिसके जल में कृष्ण ने स्नान किया एवं गोविन्द नाम से पुकारे गए, ऐसे श्री राधाकुण्ड का मैं जनम-जनम तक यश गान करूँगा।"