राधा स्तोत्रम् (ब्रह्माण्ड पुराण)

राधा स्तोत्रम् श्री राधा की स्तुति में छंदों की एक रचना है । यह ब्रह्माण्ड पुराण का एक खंड है, जो एक संस्कृत ग्रन्थ है और अठारह प्रमुख पुराणों में से एक है ।

9 लेख उपलब्ध हैं

  1. राधा पद्मानना पद्मा पद्मोद्भवसुपूजिता - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (7)

    श्री कृष्ण कहते हैं - मैं उन श्री राधा की आराधना करता हूँ जो पद्मानना (कमलमुखी) हैं, जिनका एक नाम पद्मा है, जो ब्रह्मा जी द्वारा पूजनीय हैं, एवं जिनकी महिमा पद्म पुराण में कमल के समान वर्णित है ।

  2. माधुर्ये मधुरा राधा महत्त्वे राधिका गुरु - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (5)

    श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं उन श्री राधा की आराधना करता हूँ जो मधुरता में मधुर, महत्ता में गुरु और सुन्दरता में सुन्दर हैं ।

  3. जिह्वा राधा श्रुतौ राधा - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (2)

    श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं कि मेरी जिह्वा में भी राधा है, कानों में भी राधा, नेत्रों में भी राधा, और ह्रदय में भी राधा स्थित है । मेरे सर्व अंगों में केवल श्री राधा ही व्याप्त है, श्री राधिका महारानी की ही मैं आराधना करता हूँ ।

  4. पूजा राधा जपो राधा राधिका चाभिवन्दने - ब्रह्माण्ड पुराण, राधास्तोत्रम् (3)

    श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं कि श्री राधा ही पूजन में आराधनीय हैं, श्री राधा नाम का ही मैं जप करता हूँ, श्री राधा का ही मैं अभिनंदन [नमस्कार] करता हूँ, श्री राधा का ही मैं श्रवण करता हूँ एवं श्री राधा की ही मैं स्तुति करता हूँ । श्री राधिका महारानी का ही मैं आराधन करता हूँ ।

  5. राधा रससुधासिन्धु राधा सौभाग्यमञ्जरी - ब्रह्माण्ड पुराण, राधास्तोत्रम् (6)

    श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं श्री राधा महारानी की आराधना करता हूँ क्यूँकि श्री राधा सुधा रस की सिंधु हैं, श्री राधासौभाग्य की जननी हैं एवं श्री राधा बृजांग्नाओं की मुखिया हैं।

  6. जिह्वाग्रे राधिकानाम नेत्राग्रे राधिकातनुः - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (9)

    जीभ के आगे श्री राधा का नाम, नेत्रों के आगे श्री राधा की मूर्ति, कानों के आगे श्री राधा महारानी की कीर्ति और मन से राधिका की भक्ति (भजन) सदा बना रहे ।

  7. गेहे राधा वने राधा राधिका - ब्रह्मांड पुराण, राधास्तोत्रम् (1)

    श्री कृष्ण कहते हैं कि घर में भी मुझे और वन में भी राधा का अनुभव होता है। कुछ खाता-पीता हूँ, कहीं चलता हूँ, दिन हो, रात हो, सदा राधा राधा ही मेरे रोम रोम में व्याप्त हैं।

  8. राधा कृष्णात्मिका नित्यं कृष्णो - ब्रह्माण्ड पुराण, राधास्तोत्रम् (8)

    राधा की आत्मा सदा मैं श्रीकृष्ण हूँ और मेरी (श्रीकृष्णकी) आत्मा निश्चय ही राधा हैं। श्रीराधा वृन्दावन की ईश्वरी हैं, इस कारण मैं राधा की ही आराधना करता हूँ।