सनातन गोस्वामी

सनातन गोस्वामी (1488–1558) चैतन्य महाप्रभु के एक प्रमुख शिष्य थे।

5 लेख उपलब्ध हैं

  1. वनखंड महादेव-वृंदावन लीला

    वृंदावन में अपने निवास के दौरान श्री सनातन गोस्वामी पुराने श्री मदन-मोहन मंदिर के पास अपने भजन-कुटीर में रहते थे। और दैनिक श्री गोपीश्वर महादेव के दर्शन के लिए जाते थे। जब सनातन गोस्वामी बूढ़े हो गए तो श्री गोपीश्वर महादेव ने उन्हें एक दिन सपने में निर्देश दिया कि "कृपया आप अपने बुढ़ापे में मेरे दर्शन के लिए इतनी परेशानी न करें।

  2. शरणागति के 6 लक्षण - श्री सनातन गोस्वामी, हरी भक्ति विलास (11.676)

    शरणागति के 6 लक्षण हैं जिन्हें श्री सनातन गोस्वामी जी ने अपने ग्रंथ हरी भक्ति विलास में बताया है। यदि यह 6 लक्षण हैं तो इसी के आधार पर ही माना जा सकता है कि जीव भगवान के शरणागत है या नहीं।

  3. जब श्री राधा रानी रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी के लिए मीठे चावल लेकर आती है

    एक दिन श्री रूप गोस्वामी सनातन गोस्वामी के लिए कुछ मीठे चावल बनाना चाहते थे परन्तु उनकी कुटिया में मीठे चावल बनाने के लिए आवश्यक वस्तुऐं नहीं था ।

  4. सनातन गोस्वामी को आश्चर्य हुआ - राधारानी की वेणी की तुलना नागिन से करना

    राधारानी की सनातन गोस्वामी पर कितनी कृपा थी यह एक और घटना से प्रकट होती है। श्रीरूप गोस्वामी ने 'चाटुपुष्पाञ्जलि' की रचना की। उसका प्रथम श्लोक देखकर सनातन गोस्वामी को कुछ संदेह हुआ।