श्री सहचरीशरण देव जी

श्री सहचरीशरण देव जी श्री हरिदासी संप्रदाय के तटीया स्थान के श्री राधिका दास जी के शिष्य थे, जो श्री ललित मोहिनी देव के शिष्य थे।

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  1. श्री सहचरिशरण देव जी की जीवनी

    श्री सहचरीशरण देव जी का जन्म 1773 में कश्मीर के अवन्तिपुरी में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था । इनका नाम सखाराम था । इनके पिता का नाम सिखरराम था ।

  2. हर दम याद किया कर हरि की - श्री सहचरीशरण देव, सरसमंजावली (8)

    हे मन, प्रत्येक क्षण तू श्री हरि का स्मरण किया कर, तेरे दुःख को वे हर लेंगे । मेरा कहा असत्य नहीं होगा, आनँदकंद श्री कृष्ण अवश्य तुझपर कृपा करेंगे ।

  3. बाँकी पाग चन्द्रिका तापर तुर्रा रुरकि रहा है - श्री सहचरीशरण देव, सरसमंजावली (29)

    अनंत-अनंत सौंदर्य-माधुर्य-निधि ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज के सिर पर बंधी टेडी पाग सुशोभित हो रही है। पाग पर चन्द्रिका और तिरछे लगे तुर्रे की शोभा बड़ी ही निराली है।