आये फाग खेलन गोपाल बरसाने में - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक
श्री गोपाल बरसाने में फाग (होली) खेलने के लिए पधारे हैं। चारों ओर लोग फागुन के गीत गा रहे हैं, हाथ से ताल दे रहे हैं, और सबका हृदय आनंद से झूम रहा है।
“षड्ऋतु अष्टक” “ब्रज बिनोद” ग्रंथ का पाँचवाँ अध्याय है, जिसके रचयिता श्री लाल बलबीर जी हैं। इस ग्रंथ में ब्रजमंडल की छहों ऋतुओं की मधुरता और सौंदर्य का अत्यंत सरस एवं मनोहारी वर्णन किया गया है।
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श्री गोपाल बरसाने में फाग (होली) खेलने के लिए पधारे हैं। चारों ओर लोग फागुन के गीत गा रहे हैं, हाथ से ताल दे रहे हैं, और सबका हृदय आनंद से झूम रहा है।
मेरे श्री राधारमण अत्यंत सुंदर और सुकुमार अवस्था वाले हैं। उनके सौंदर्य की छवि ऐसी अनुपम है कि उस पर मैं कोटि-कोटि कामदेव और रति को भी बार-बार न्यौछावर कर दूँ।
सुख की राशि, श्री राधारमण लाल जी की जय हो! रसिकों के प्राण, जीवन धन की जय हो! हे राधारमण लाल, कृपा कर मेरे हृदय में भी सदा निवास करें।
चारों ओर पलाश के फूल खिल उठे हैं, जिनकी मनोहर छटा ने वनों और उपवनों को रंगों से भर दिया है। कोयल अपनी मधुर वाणी में कूकने लगी है, मानो प्रेम का संदेश सुना रही हो।