भरोसो इन चरणन को मेरे - श्री शीतलदास जी
श्री राधा के युगल चरणों पर ही मेरा अनन्य एवं अटूट विश्वास है। जिनके श्री चरणों की रज की वांछा स्वयं ब्रह्मा भी करता रहता है।
श्री शीतल दास जी, ब्रज के एक रसिक भक्त
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श्री राधा के युगल चरणों पर ही मेरा अनन्य एवं अटूट विश्वास है। जिनके श्री चरणों की रज की वांछा स्वयं ब्रह्मा भी करता रहता है।
हे मन, श्री राधिका के चरणकमलों की भक्ति कर, जिनका स्मरण करने से 84 लाख योनियों के भवसागर का आवागमन जल्द ही समाप्त हो जाता है ।
हे श्री राधे! मैं तुमको चंपक वरनी [चंपक वर्ण वाली] कहूँ, मन हरनी [मन का हरण करने वाली] कहूँ या रसामृत-सागर की स्रोत कहूँ । हे राधा! क्या मैं तुमको बाधा हरण करने वाली कहूँ या कीर्ति कुमारी कहूँ जिस नाम से संपूर्ण विश्व आपको जानता है ।