श्री शीतल दास जी

श्री शीतल दास जी, ब्रज के एक रसिक भक्त

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  1. चम्पक वरनी मनहरनी कहूँ - श्री शीतल जी

    हे श्री राधे! मैं तुमको चंपक वरनी [चंपक वर्ण वाली] कहूँ, मन हरनी [मन का हरण करने वाली] कहूँ या रसामृत-सागर की स्रोत कहूँ । हे राधा! क्या मैं तुमको बाधा हरण करने वाली कहूँ या कीर्ति कुमारी कहूँ जिस नाम से संपूर्ण विश्व आपको जानता है ।