श्रीललिता जू बीरी बनाय खवावैं हो - श्री केशव देव जी
श्रीललिता जी दिव्य दंपति (श्री राधा कृष्ण) को पान की बीड़ी बनाकर खवा रही हैं। करकमल में कंचन की थाली शोभित हो रही है। वे रमक झमक करती हुई चली आ रही हैं।
गोस्वामी श्री केशव देवजी 18वीं सदी के वृन्दावन के रसिक भक्त थे जो बांके बिहारी के सेवा अधिकारी एवं अनन्य उपासक थे ।
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श्रीललिता जी दिव्य दंपति (श्री राधा कृष्ण) को पान की बीड़ी बनाकर खवा रही हैं। करकमल में कंचन की थाली शोभित हो रही है। वे रमक झमक करती हुई चली आ रही हैं।
हे प्यारी जू! कुंज में पधारो, अब बहुत देर हो चुकी है । शीतल और सुगंधित समीर बह रही है एवं बादलों से मंद मंद वर्षा की फुहार हो रही है ।
अहो, श्री वृन्दावन धाम धन्य है, जहाँ संतों का समाज रहता है जो नित्य श्री हरि के नाम का उच्चारण करते रहते हैं।