श्री राधा नाम अंक [श्री रूप माधुरी जी]
श्री राधा नाम अंक श्री रूप माधुरी शरण जी की वाणी के प्रथम अध्याय दोहावली का चौथा भाग है, जिसमें अति गोपनीय सुन्दर श्री राधा के नाम का वर्णन है।
7 लेख उपलब्ध हैं
रसिक रसीली रसभरी रसरूपा रस - श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (02)
समस्त रसिकों को परम रस प्रदान करने वाली श्रीराधारानी स्वयं रसस्वरूपिणी और दिव्य प्रेम-रस की सारस्वरूपा हैं। वे ही समस्त रसिकों की एकमात्र जीवन-प्राण तथा समस्त सखियों की परम स्वामिनी हैं।
गौरांगी श्रीराधिका प्रीतम की उरहार- श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (01)
गोरे अंगों वाली श्रीराधिका अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के हृदय का हार हैं। वे सबके मन को मोहने वाले (मनमोहन) श्रीकृष्ण के मन को भी मोहने वाली हैं तथा अत्यंत कृपालु और परम उदार हैं।
रसविलसनी रसमगन नित - श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (18)
श्री रूपमाधुरी जी प्रार्थना करते हैं कि जो सदैव रस-विलास में निमग्न रहती हैं और जिनकी अनुपम छवि प्रत्येक क्षण नवीन एवं अद्भुत प्रतीत होती है, ऐसी श्री राधाजू का वह परम विलक्षण स्वरूप उनके हृदय में सदा के लिए निवास करे।
कुंजभवन सर्वेश्वरी साहिबनी सिरताज - श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (16)
कुंजमहल की स्वामिनी, सबकी अधीश्वरी और साहिबनी, सबमें श्रेष्ठ शिरोमणि श्री राधा हैं। वे आनंद की मूल स्रोत हैं, अत्यन्त कोमल हृदय वाली और सदा दीन-दुखियों पर कृपा करने वाली हैं।
उर प्रकाश हो रूप को - श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (21)
यदि कोई “श्री राधा” नाम का सतत जप करने का नियम दृढ़ता से धारण कर ले, तो शीघ्र ही उसके हृदय में श्री राधा का दिव्य रूप प्रकाशित होने लगे और नेत्रों में प्रेम झलकने लगे ।
विपिन वास दैनी प्रिया करुणा की भंडार - श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (17)
करुणा की भंडार श्री प्यारी जू (श्री राधा) ने कृपा कर मुझे श्री धाम वृंदावन का वास प्रदान किया है । जिन पर श्री राधा अपनी थोड़ी सी दृष्टि डाल देती हैं, उनके अनंत कष्टों को नष्ट कर देती हैं ।
श्रीराधा के नाम की रटना रखै जो नित्त - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (20)
जो नित्य “श्री राधा” नाम की रटना लगाता है, उसका चित्त सहज ही स्थिर हो जाता है।