चातुरी पांच गौर सरकार - श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (5)
गौरांगी स्वामिनी राधा पांच प्रकार की दक्षता से पूर्ण हैं। प्रथम दक्षता तो नृत्य-काल में उनके भ्रूनर्तन की है, जिसे देखकर उनके रसिक प्रियतम उन पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हैं। दूसरी दक्षता उनके तिरछे कटाक्षपातों की है जो प्रियतम के हृदय को घायल करने के लिए बरछी का कार्य करते हैं।
