श्री राधा त्रयोदशी

श्री राधा त्रयोदशी श्री राधारानी को समर्पित तेरह पदों का संग्रह है जिसमें श्री राधा की अतुलनीय सुंदरता, मृदु स्वभाव एवं विलक्षण चरित्र का अद्भुत वर्णन जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा किया गया है। लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

3 लेख उपलब्ध हैं

  1. चातुरी पांच गौर सरकार - श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (5)

    गौरांगी स्वामिनी राधा पांच प्रकार की दक्षता से पूर्ण हैं। प्रथम दक्षता तो नृत्य-काल में उनके भ्रूनर्तन की है, जिसे देखकर उनके रसिक प्रियतम उन पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हैं। दूसरी दक्षता उनके तिरछे कटाक्षपातों की है जो प्रियतम के हृदय को घायल करने के लिए बरछी का कार्य करते हैं।

  2. छबीली छबि, लखि छबि मानी हार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (2)

    छवि की खान श्री राधा का दर्शन कर साक्षात् छवि भी पराजित हो गई। मूर्तिमती छवि हाथ जोड़े भानुनन्दिनी की सेवा में खड़ी रहती हैं।

  3. हमारी गौर वरनि सरकार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्री राधा त्रयोदशी (1)

    स्वामिनी श्री राधा जू गौर वर्ण वाली हैं। प्रियतम श्यामसुन्दर के चित्त को चुराने वाली वृषभानुनन्दिनी अत्यन्त ही भोली भाली हैं।