मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी
मेरी प्यारी श्री राधिका रंग रंगीली एवं सुकुमारी हैं । मेरे बिहारीजी सभी सुखों के धाम हैं, जो रूप से उज्ज्वल हैं और रसिक चूड़ामणि हैं ।
श्री विहारिवल्लभ, वृंदावन के एक रसिक संत और हरिदासी संप्रदाय के श्री भागवत रसिक देव के शिष्य थे ।
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मेरी प्यारी श्री राधिका रंग रंगीली एवं सुकुमारी हैं । मेरे बिहारीजी सभी सुखों के धाम हैं, जो रूप से उज्ज्वल हैं और रसिक चूड़ामणि हैं ।
सबसे उदासीन रहें एवं सबका आदर करें जिससे सब आपसे प्रेम करें, ऐसी रहनी से रहिये । अपनी जीभ से दूसरों की निंदा एवं स्तुति न करिए, एवं उसको निरंतर श्री राधा कृष्ण के नाम का उच्चारण करने में लगाइए ।
जो भगवान श्री कृष्ण काल के भी काल हैं, लोकपालों के भी पालनहार हैं, सबके नियंता हैं और स्वयं सदा स्वतंत्र हैं।
श्री राधा की महिमा को गाना चाहिए, यमुना नदी के पवित्र जल में स्नान करना चाहिए, शुद्ध पानी पीना चाहिए और वृंदावन में रहना चाहिए।