श्री विहारिवल्लभ

श्री विहारिवल्लभ, वृंदावन के एक रसिक संत और हरिदासी संप्रदाय के श्री भागवत रसिक देव के शिष्य थे ।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

    मेरी प्यारी श्री राधिका रंग रंगीली एवं सुकुमारी हैं । मेरे बिहारीजी सभी सुखों के धाम हैं, जो रूप से उज्ज्वल हैं और रसिक चूड़ामणि हैं ।

  2. सब तें न्यारे सबके प्यारे - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

    सबसे उदासीन रहें एवं सबका आदर करें जिससे सब आपसे प्रेम करें, ऐसी रहनी से रहिये । अपनी जीभ से दूसरों की निंदा एवं स्तुति न करिए, एवं उसको निरंतर श्री राधा कृष्ण के नाम का उच्चारण करने में लगाइए ।