सदा राधाकृष्णोच्छलदतुल - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी - स्व: नियम दशकम (3)
मैं युग के समान अति दीर्घकाल पर्यन्त विरही होते हुए भी सदा श्री राधा कृष्ण के उल्लासयुक्त अतुलनीय लीलास्थल इस ब्रजधाम को त्यागकर पूर्ण एश्वर्य से दीप्तिमान श्री यदुपति को, उनके कहने पर भी उनके दर्शन करने के लिए क्षणमात्र को भी श्री द्वारिका नहीं जाऊँगा ।
